No more Germany transit visa required – जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए अपने एयरपोर्ट्स पर वीजा-फ्री ट्रांजिट की सुविधा की घोषणा कर दी है। यह फैसला जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत दौरे के दौरान लिया गया, जो 12-13 जनवरी 2026 को हुआ।
चांसलर मर्ज का ऐतिहासिक दौरा
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का यह भारत का पहला दौरा था, जो बतौर फेडरल चांसलर उनका एशिया का भी पहला विदेश दौरा रहा। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहमदाबाद में मुलाकात हुई, जहां दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान जारी किया। इस अवसर पर ट्रांजिट वीजा छूट की घोषणा हुई, जिसे पीएम मोदी ने लोगों के बीच रिश्ते मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा, “मैं चांसलर मर्ज का भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा करने पर आभार व्यक्त करता हूं।”

वीजा-फ्री ट्रांजिट क्या है?
वीजा-फ्री ट्रांजिट का मतलब है कि भारत से किसी तीसरे देश जाते समय अगर फ्लाइट जर्मनी के एयरपोर्ट (जैसे फ्रैंकफर्ट या म्यूनिख) पर रुकती है, तो अलग से ट्रांजिट वीजा (शेंगन टाइप A) की जरूरत नहीं। यात्री को एयरपोर्ट के इंटरनेशनल ट्रांजिट जोन में ही रहना होगा और 24 घंटे के अंदर अगली फ्लाइट पकड़नी होगी। पहले भारतीयों को इसकी प्रक्रिया में 15 दिन लगते थे और फीस ₹6,629 तक चुकानी पड़ती थी। अब कागजी कार्रवाई कम हो जाएगी, लेकिन जर्मनी या शेंगन क्षेत्र में घूमने के लिए पर्यटक वीजा अभी भी जरूरी रहेगा।
No more Germany transit visa required! – यात्रियों के लिए फायदे
यह बदलाव लाखों भारतीय यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा, खासकर यूएस, कनाडा या लैटिन अमेरिका जाते वक्त। समय और पैसे की बचत होगी, साथ ही यात्रा आसान बनेगी। व्यवसायिक और छुट्टियों के सफर वाले लोग सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। उदाहरणस्वरूप, भारत से अमेरिका जाते समय जर्मनी में 8-12 घंटे का स्टॉपओवर अब बिना वीजा तनाव के गुजरेगा। हालांकि, यात्रियों को एयरलाइंस से पुष्टि कर लेनी चाहिए।
भारत-जर्मनी संबंधों का नया अध्याय
यह घोषणा भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने पर आई है, जो राजनयिक संबंधों के 75 वर्षों का प्रतीक है। दौरे में शिक्षा, तकनीक, रक्षा और ग्रीन डेवलपमेंट पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने जर्मन यूनिवर्सिटीज को भारत में कैंपस खोलने का न्योता दिया। वैश्विक मुद्दों जैसे रूस-यूक्रेन और गाजा पर भी बात हुई। यह कदम दोनों देशों के बीच यात्रा, व्यापार और लोगों के संपर्क को बढ़ावा देगा।